हेनरी मूर : खाली जगहों को तराशता हुआ आदमी — (गद्यात्मक फिक्शन)
बारिश के बाद की मिट्टी में हल्की नमी थी। कार्यशाला के बाहर पड़े बड़े-बड़े पत्थर और कांस्य की आकृतियाँ दूर से किसी प्राचीन जीव की हड्डियों जैसी लगती थीं। उनके बीच चलते हुए Henry Moore बार-बार रुक जाते थे, जैसे वे आकारों से अधिक उनके बीच की खाली जगहों को देख रहे हों।
उन्हें लगता था कि मूर्तिकला केवल ठोस पदार्थ की कला नहीं है। असली अर्थ कई बार उस रिक्त स्थान में छुपा होता है जो आकृतियों के बीच बचा रह जाता है।
एक स्त्री लेटी हुई है। उसका शरीर पूर्ण नहीं है। बीच में एक खुला हुआ हिस्सा है जहाँ से आकाश दिखाई देता है। लेकिन वही खालीपन मूर्ति को साँस देता है।
मूर धीरे-धीरे समझने लगे थे कि मनुष्य केवल अपनी उपस्थिति से नहीं बनता। वह अपनी अनुपस्थितियों से भी बनता है — जो खो गया, जो कभी कहा नहीं गया, जो भीतर खाली रह गया।
उनकी मूर्तियाँ इसलिए कई बार अधूरी-सी लगती हैं। उनमें शरीर है, लेकिन शरीर टूटकर परिदृश्य में बदलता रहता है। पत्थर कई बार पहाड़ी जैसा लगता है, और पहाड़ी किसी सोए हुए शरीर जैसी।
उन्हें प्रकृति से गहरा लगाव था। हड्डियाँ, सीपियाँ, पेड़ों की जड़ें, पहाड़ — वे इन सबमें एक समान संरचना देखते थे। जैसे मनुष्य और प्रकृति के बीच कोई पुराना संबंध अब भी बचा हुआ हो।
एक बच्चा समुद्र किनारे पड़ी हुई हड्डी उठाता है। उसे वह अजीब तरह से सुंदर लगती है। मूर शायद कहते — सुंदरता पूर्णता में नहीं, संरचना की जीवित सच्चाई में है।
द्वितीय विश्वयुद्ध के दिनों में उन्होंने भूमिगत स्टेशनों में सोते हुए लोगों के चित्र बनाए। शरीर एक-दूसरे के पास थे, लेकिन हर चेहरा अपने भीतर अकेला था। उस समय के बाद उनकी मूर्तियों में मानवीय असुरक्षा और भी गहरी हो गई।
वे विशाल आकृतियाँ बनाते थे, लेकिन उनमें कोई शक्ति-प्रदर्शन नहीं था। वे शांत थीं, लगभग मौन। जैसे पत्थर मनुष्य की थकान को अपने भीतर समेटे हुए हो।
धीरे-धीरे मूर के लिए मूर्तिकला आकार बनाने की कला नहीं रही। वह शून्य और उपस्थिति के बीच संतुलन खोजने की प्रक्रिया बन गई।
और शायद इसी कारण उनकी मूर्तियों को देखते हुए कई बार ऐसा लगता है कि जो दिखाई दे रहा है, उससे अधिक महत्वपूर्ण वह है जो खाली छोड़ दिया गया है।
Henry Moore (1898–1986, इंग्लैंड) आधुनिक मूर्तिकला के प्रमुख कलाकारों में गिने जाते हैं।
उन्होंने जैविक आकृतियों, रिक्त स्थानों और प्रकृति से प्रेरित रूपों के माध्यम से आधुनिक मूर्तिकला को नई दिशा दी।
उनकी “Reclining Figures” श्रृंखला विश्वकला में मानवीय शरीर और परिदृश्य के अद्वितीय संयोजन के लिए प्रसिद्ध है।
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