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Wednesday, 20 May 2026

सल्वाडोर दाली : स्वप्न के भीतर चलता हुआ आदमी —

सल्वाडोर दाली : स्वप्न के भीतर चलता हुआ आदमी — (गद्यात्मक फिक्शन)

एक घड़ी दीवार पर टंगी थी।
लेकिन वह पिघल रही थी।

समय जैसे मोम बन गया था।

Salvador Dalí को हमेशा लगता था कि वास्तविकता उतनी स्थिर नहीं है जितनी दिखाई देती है।
मनुष्य का सबसे सच्चा संसार कई बार उसकी जागती हुई दुनिया नहीं,
उसके स्वप्न होते हैं।

एक आदमी सड़क पर चल रहा है।
अचानक उसे लगता है कि सामने का चेहरा उसने पहले भी कहीं देखा है 
शायद किसी पुराने सपने में।

दाली ऐसे ही क्षणों से मोहित थे।

उनके लिए अवचेतन केवल मनोविज्ञान का विषय नहीं था।
वह कला का सबसे गहरा स्रोत था।

वे चाहते थे कि चित्र तर्क से नहीं,
स्वप्न की तरह काम करें —
अस्पष्ट, विचित्र, लेकिन भीतर कहीं अजीब तरह से परिचित।

एक रेगिस्तान है।
बीच में अकेला पेड़।
उसकी शाखा पर लटकी हुई पिघलती घड़ियाँ।

दुनिया पूछती है — “इसका अर्थ क्या है?”

दाली शायद कहते —
स्वप्न हमेशा सीधे अर्थ नहीं देते; वे मनुष्य के भीतर छुपी हुई बेचैनियों की आकृतियाँ बनाते हैं।

धीरे-धीरे
उनकी कला वास्तविकता और भ्रम के बीच की सीमा मिटाने लगी।

चेहरे टूटते हैं।
वस्तुएँ आकार बदलती हैं।
समय तरल हो जाता है।

दाली को लगता था कि आधुनिक मनुष्य स्वयं अपने भीतर विभाजित है 
एक हिस्सा सामाजिक जीवन जीता है,
दूसरा भीतर चुपचाप स्वप्न देखता रहता है।

और कई बार
वही स्वप्न अधिक सच्चे होते हैं।

उनकी मूँछें, उनका व्यवहार, उनका सार्वजनिक व्यक्तित्व — सब कुछ एक प्रदर्शन जैसा लगता था।
लेकिन उस प्रदर्शन के भीतर भी एक गहरी बेचैनी छुपी थी:
क्या वास्तविकता स्वयं एक विशाल भ्रम हो सकती है?

और अंत में,
दाली किसी कला-दर्शन में स्थिर नहीं रहे 
वे उस आधे खुले दरवाज़े में रह गए
जहाँ मनुष्य पहली बार
अपने ही अवचेतन को
चित्र की तरह सामने देखता है।


Salvador Dalí (1904–1989, स्पेन) अतियथार्थवादी (Surrealist) आंदोलन के विश्वप्रसिद्ध चित्रकार थे।
उनकी कृति The Persistence of Memory आधुनिक कला की सबसे प्रसिद्ध पेंटिंग्स में गिनी जाती है, जिसमें पिघलती घड़ियों के माध्यम से समय, स्वप्न और अवचेतन की विचित्र प्रकृति को व्यक्त किया गया है।


मुकेश ,,,,,,,,,

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