(बहर: फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन)
रदीफ़: “बाक़ी है यहाँ”
क़ाफ़िया: तपिश / प्यास / एहसास / उजास / लिबास / विश्वास
तेरी यादों की तपिश आज भी बाक़ी है यहाँ,
दिल के वीरान में इक प्यास भी बाक़ी है यहाँ।
रात तन्हा है मगर चाँद उतर आता है,
तेरे होने का कोई एहसास भी बाक़ी है यहाँ।
वक़्त बहता ही गया रेत की मानिंद मगर,
कुछ अधूरी-सी दुआओँ का उजास भी बाक़ी है यहाँ।
मैंने चाहा था कि सब भूल के आगे बढ़ जाऊँ,
तेरी आवाज़ का इक नरम लिबास भी बाक़ी है यहाँ।
दिल के दरवाज़े पे ख़ामोश हवाएँ हैं बहुत,
फिर भी मिलने की कोई आस भी बाक़ी है यहाँ।
तेरे जाने से मिरी रूह बिखर तो गई थी,
इश्क़ का आख़िरी विश्वास भी बाक़ी है यहाँ।
मक़ता:
'मुकेश' उम्र की धूप ने सब रंग मिटा डाले मगर,
तेरी आँखों का वही नूर ख़ास भी बाक़ी है यहाँ।
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