अब जब उसकी याद आती है,

 अब जब उसकी याद आती है,

मैं दुखी नहीं होता।

बस थोड़ी देर के लिए

समय धीमा पड़ जाता है।

चाय ठंडी होने लगती है।

खिड़की के बाहर का पेड़

स्थिर दिखाई देता है।

और भीतर

कोई पुराना कमरा खुल जाता है।

मैं वहाँ जाता नहीं।

सिर्फ़ दरवाज़े पर खड़ा रहता हूँ।

कुछ स्मृतियाँ

मिलने के लिए नहीं,

बस यह जानने के लिए होती हैं

कि वे अभी भी जीवित हैं।

मुकेश ,,,,,,

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है