खिड़की
खिड़की
घरों में
खिड़कियाँ बची हुई हैं
मगर खुलती नहीं।
लोगों को डर है
कि कहीं हवा
कोई नया विचार न ले आए।
कहीं धूप
पुराने विश्वासों पर
सवाल न लिख दे।
कहीं कोई चिड़िया
स्वतंत्रता का गीत न गा बैठे।
इसलिए
खिड़कियाँ बन्द हैं।
और भीतर
दम घुटने को
"सुरक्षा" कहा जा रहा है।
मुकेश ,,,,
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