समुद्र

 समुद्र

प्रेम करने वाले

समुद्र को देखने नहीं जाते।

वे उसके सामने बैठकर

अपने भीतर की लहरें सुनते हैं।

समुद्र की तरह

उनके पास भी

कुछ तट हैं,

कुछ तूफ़ान,

कुछ डूबे हुए जहाज़।

वे जानते हैं

हर गहराई में मोती नहीं होते।

कुछ गहराइयों में

केवल अँधेरा होता है।

फिर भी वे उतरते हैं।

क्योंकि प्रेम

सुरक्षित तैराकी का खेल नहीं,

अज्ञात की ओर एक यात्रा है।

मुकेश ,,,,

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