तकिया

 तकिया

उसने पूछा

तुम्हारा तकिया

इतना दबा हुआ क्यों है?

मैंने कहा

सिर रखता हूँ उस पर।

वो हँसी—

सब रखते हैं।

इतना तो किसी का नहीं दबता।

मैंने कहा

नींद से ज़्यादा

ख़याल रखता हूँ।

कुछ देर चुप रही।

फिर बोली—

अच्छा...

इसलिए

तुम्हारे ख़याल

सुबह उठ जाते हैं,

और तुम

देर तक सोते रहते हो।

— मुकेश

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