तुमसे पहले

 तुमसे पहले

तुमसे पहले भी

ज़िंदगी थी।

दिन निकलते थे,

शामें उतरती थीं,

बारिशें होती थीं।

मगर...

उनमें कोई

मेरा इंतज़ार नहीं करता था।

मुकेश ,,,,,,,,,,

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