अनुपस्थिति का पानी

 अनुपस्थिति का पानी

प्रेम

वहाँ भी बहता है

जहाँ कोई नदी नहीं होती।

एक सूखी ज़मीन पर

तुम्हें अचानक

ठंडक महसूस होती है।

वही अनुपस्थिति का पानी है।

जिसे न छुआ जा सकता है

न रोका जा सकता है।

वह बस

किसी के चले जाने के बाद

रह जाता है

और धीरे-धीरे

पूरे अस्तित्व को सींच देता है।

— Mukesh

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