आदमी

  आदमी

धीरे-धीरे

अपने परिचय-पत्र में बदल रहा है।

उसका नाम

एक नम्बर हो गया है।

उसकी पहचान

एक क्यूआर कोड।

उसकी उपस्थिति

एक ओटीपी।

उसकी अनुपस्थिति

एक डेटा एरर।

लेकिन उसकी माँ

आज भी उसे

उसी नाम से बुलाती है

जिस नाम से

पहली बार बुखार में

उसका माथा छुआ था।

तकनीक हर बार

यहीं आकर हार जाती है।

मुकेश ,,,,

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