मैंने उसकी याद को किताब से निकालकर
कल रात
मैंने उसकी याद को
किताब से निकालकर
मेज़ पर रख दिया।
सोचा,
अब इससे कोई रिश्ता नहीं।
सुबह देखा—
याद वहीं थी,
पर किताब चली गई थी।
तब समझ में आया,
कुछ लोग
जीवन से नहीं जाते।
वे बस
उस जगह आकर बैठ जाते हैं
जहाँ हम स्वयं को पढ़ते हैं।
मुकेश ,,,,,,
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