इत्तिफ़ाक़

 इत्तिफ़ाक़

आज फिर

तुम्हारा ज़िक्र नहीं हुआ।

फिर भी,

पूरी शाम

तुम्हारे साथ गुज़र गई।

मुकेश ,,,,,,,,,,

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