मौन
मौन
इस समय
धरती पर सबसे संकटग्रस्त चीज़
शायद मौन है।
हर तरफ़ आवाज़ें हैं।
घोषणाएँ।
विज्ञापन।
बहसें।
प्रमाणपत्र।
व्याख्याएँ।
मगर मौन
लगातार पीछे हट रहा है।
जैसे जंगल
शहरों से पीछे हटते हैं।
जैसे नदियाँ
कारखानों से।
एक दिन
जब आख़िरी मौन भी
विलुप्त हो जाएगा
तब मनुष्य को पता चलेगा
कि उसने
सुनना कब का छोड़ दिया था।
मुकेश ,,,,
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