उसने मुझे कभी छोड़ा नहीं,
उसने मुझे कभी छोड़ा नहीं,
क्योंकि उसने मुझे कभी पाया ही नहीं था।
मैं ही था
जो उसके आसपास
एक घर बनाता रहा।
वह आती,
कुछ देर बैठती,
खिड़की से बाहर देखती,
और चली जाती।
मैं हर बार
एक और कमरा जोड़ देता।
आज पूरा मकान खड़ा है।
बस उसमें
कोई रहता नहीं।
एक दिन उसने पूछा था,
"तुम इतना याद क्यों रखते हो?"
मैं हँस दिया।
कैसे बताता,
मेरे भीतर
भूलने की कोई जगह ही नहीं थी।
जो लोग चले गए,
वे भी वहीं रहे।
जो बातें नहीं हुईं,
वे भी।
जो प्रेम कभी हुआ ही नहीं,
वह तो सबसे अधिक जगह घेरता रहा।
मुकेश ,,,,,,
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