पागलपन की परिभाषा

 पागलपन की परिभाषा

एक ही शहर में

तीन लोग चलते हैं

प्रेमी,

पागल,

और कवि।

लोग कहते हैं

तीनों अलग हैं।

लेकिन उनके भीतर

एक ही अस्थिर रोशनी जलती है।

वे चीज़ों को वैसे नहीं देखते

जैसा बताया गया है।

वे उन्हें वैसे देखते हैं

जैसा वे हो सकती थीं।

यही कारण है

कि व्यवस्था उन्हें

थोड़ा असहज मानती है।

मुकेश ,,,,

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