तुमने एक प्रश्न पूछा।
तुमने एक प्रश्न पूछा।
बहुत साधारण-सा।
जैसे कोई बच्चा
नदी से उसका पता पूछ ले।
पर उत्तर देने के बजाय
हवा दिशा बदल गई।
पेड़ों ने पत्तियाँ समेट लीं।
आकाश ने
अपना नीला वस्त्र उतारकर
धूसर चादर ओढ़ ली।
कुछ प्रश्न
शब्दों से नहीं,
उपस्थितियों से उत्तर माँगते हैं।
और मेरी उपस्थिति
उन दिनों तुम्हारे पास नहीं थी।
मुकेश ,,,,
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