गणना के बाहर
गणना के बाहर
प्रेम
किसी जोड़-घटाव का परिणाम नहीं होता।
वह आता है
और सारे उत्तर बदल देता है।
समाज उसे मापना चाहता है
आय, योग्यता, उपयोगिता में।
पर प्रेम
इन सब इकाइयों से बाहर खड़ा रहता है।
वह न लाभ है
न हानि।
वह बस
एक ऐसी उपस्थिति है
जिसे समझाने के लिए
शब्द हमेशा कम पड़ जाते हैं।
मुकेश ,,,,
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