समाज की गणना

 समाज की गणना

समाज के पास

हर चीज़ का हिसाब है

कितना काम,

कितना लाभ,

कितनी उपयोगिता।

लेकिन प्रेम

इस सूची में कहीं नहीं आता।

इसलिए वह

संदिग्ध माना जाता है।

प्रेमी को

अनुत्पादक कहा जाता है।

कवि को

अव्यावहारिक।

पागल को

असामान्य।

पर शायद

वे तीनों

एक ही सत्य के अलग नाम हैं—

जो अभी तक

गणित में शामिल नहीं हुआ।

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