“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
एक दिन -------------
Get link
Facebook
X
Pinterest
Email
Other Apps
एक दिन हथेलियों पे उग आये कुछ बर्फ के गोले सोखने लगे धीरे धीरे मेरा गुनगुनापन और अब मै गल कर बह चूका हूँ दूर तक जंहा तक ये सूखी रेखाएं देखते हो इस जमी पे
Comments
Post a Comment