“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
गुज़र जाए ना ये हंसी मुलाक़ात का पल
Get link
Facebook
X
Pinterest
Email
Other Apps
गुज़र जाए ना ये हंसी मुलाक़ात का पल फिर ज़िन्दगी भर तरसना पड़े पल पल
लिहाजा अब छोडो ये रुसवाइयों की बातें
आओ थोड़ी देर कर लें मुहब्बत की बातें
मुकेश इलाहाबादी ----------------------
Comments
Post a Comment