वो तो दौड़े चले आये थे आहट सुन के


cजो देखा हमको तो ठिठक गए -------
मुकेश इलाहाबादी ------------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है