“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है
जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है
और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
इश्क के बहाने ही सही ये काम तो हुआ
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इश्क के बहाने ही सही ये काम तो हुआ गुमनाम था मुकेश कुछ नाम तो हुआ थक गया था बहुत ज़िन्दगी के काम से जुल्फों की छांव मे कुछ आराम तो हुआ मुकेश इलाहाबादी -----------------------
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