दिल चन्दन जलाते रहे


 

दिल चन्दन जलाते रहे
प्यार  को  महकाते रहे
 

प्यार बूते पत्थर हमारा
पर प्रेम पुष्प चढाते रहे
 

रिश्तों  के मंदिर मे हम
दीप विश्वास जलाते रहे
 

लाख दर्द दिल मे निहाँ
मगर हम मुस्काते रहे
 

ग़ज़ल के गुलदस्ते बना
तन्हाई को सजाते रहे

मुकेश इलाहाबादी ---

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  1. आपकी यह रचना कल मंगलवार (18 -06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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