वक़्त मुहब्बत के शोलों को और हवा देता है



वक़्त मुहब्बत के शोलों को और हवा देता है
ये कोई अलाव नहीं जो धीमे धीमे बुझ जाए
मुकेश इलाहाबादी -------------------------------

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