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गोरी पनघट पर आओ तुम
गोरी पनघट पर आओ तुम
दरिया हूं भर ले जाओ तुम
चॉद सितारा बन चमका हूं
आंगन मे आ के नाचो तुम
बनके फूल मोगरा महका हूं
गूंथ के गजरा सजा लो तुम
प्रिय सावन का मै झूला हूं
अब प्रेम पींग बढा लो तुम
प्रेम नगीना बन के आया हूं
कंठ हार मे जडवा लो तुम
मुकेष इलाहाबादी ...........
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