ठाकुर जी से मांगे घरभर कि ख़ुशहाली अम्मां
ठाकुर जी से मांगे घरभर कि ख़ुशहाली अम्मां
नाती पोता की किलकारी से खुश रहतीं अम्मा
जबतक हम घर नलौटें घड़ी देखती रहतीं अम्मां
बदले में अपनी खातिर हैं कुछ न कहतीं अम्मा
घरभर खाये मालपुआ अम्मा खायें केवल दलिया
बात -२ पे बहूकी झिडकी सुन चुप रह जातीं अम्मां
बिजली का बिल पानी का बिल सब हैं भरती अम्माँ
गर बाबू की पेंशन न होती तो फ़िर क्या करतीं अम्मां
जब घर वाले मेला देखें चौकीदारी करतीं रहतीं अम्मां
बाबूजी जी के जाने के बाद हुई कितनी अकेली अम्मा
मुकेश इलाहाबादी ---------------------------------------
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