ऐ मुकेश, किसी रुबाई किसी ग़ज़ल किसी छंद में नहीं आती

ऐ मुकेश, किसी रुबाई किसी ग़ज़ल किसी छंद में नहीं आती
उसकी खूबसूरती उसकी पाकीज़गी किसी तौर बयाँ नहीं होती
मुकेश इलाहाबादी -----------------------------------------------

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