फ़लक़ ऐ ज़ीस्त में कभी सूरज भी तुलू होगा ?



 फ़लक़ ऐ ज़ीस्त में कभी सूरज भी तुलू होगा ? 
तेरी ज़ुल्फ़ों के छाँव में हमने ये सोचा ही नहीं !
मुकेश इलाहाबादी --------------------------------

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