आज भी मै,तेरी झील सी आँखों का तलबगार हूँ,

आज भी मै,तेरी झील सी आँखों का तलबगार हूँ,
ये देख समंदर लौट गया मेरी दहलीज पे आकर
मुकेश इलाहाबादी ---------------------------------

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