ताकि, भूल जाऊं तुमको

ताकि,
भूल जाऊं तुमको
तुम्हारे जाने के बाद
गाड़ आया था
ज़मीन में
तुम्हारी यादें
तुम्हारे खत ,,,,,
पर,,,
मुझे क्या पता था,
ये ज़मीन, हवा और पानी भी
तुम्हारा साथ देगी
और एक दिन
तुम उग आओगी
फूल का पौधा बन के
और महका करोगी
अहर्निश
मेरे सहन में
मेरे वज़ूद में
हरश्रृंगार की तरह

मुकेश इलाहाबादी ----- 


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