खौलती धूप बरसती है

खौलती धूप
बरसती है
दिन भर
और
उग आते हैं
फफोले
जिस्मो जॉ पे

सॉझ
मल जाती है
संदली मलहम
रिसते घावों पे


रात
तब्दील हो जाती है
रातरानी मे
जो महमहाती है
तेरे रेशमी यादों के ऑचल मे

मुकेश इलाहाबादी .

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