सब के सब मजबूर मिले

सब के सब मजबूर मिले
दर्द ओ ग़म से चूर मिले
केवल मै ही था गुमनाम
बाकी सब मशहूर मिले
जिस्मो की नजदीकी थी
दिलसे लेकिन दूर मिले

चेहरे हमने जितने देखे
सबके सब बेनूर मिले

दूजे की क्या बात करें ?
तुम भी तो मगरुर मिले


 मुकेश इलाहाबादी --------------

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