चर्चा ऐ ईश्क आम हो गया

चर्चा ऐ ईश्क आम हो गया
बैठे बैठाये बदनाम हो गया
लिफाफा खुलते ही ख़त का
मज़मून सरे- आम हो गया
तेरा अदा से यूँ मुस्कुराना
तेरी  हाँ का पैग़ाम हो गया
तूने ज़ख्म सोच के दिए था
मेरे लिए तो इनाम हो गया
मुकेश जलसों की जान था
जाने क्यूँ गुमनाम हो गया
मुकेश इलाहाबादी ---------

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