मेरी यात्रा

सुमी,

मेरी यात्रा
खत्म हो गयी
तुम पे आ के
और तुम्हारी
शुरू हुई
इसके आगे ...

मुकेश इलाहाबादी ---

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है