लिखना तो बहतु कुछ चाहता था

लिखना तो
बहतु कुछ चाहता था
नए साल की
नई डायरी में
पर
बहुत कुछ सोचने के बाद
सिर्फ तुम्हारा नाम लिखा
और देखता रहा कुछ देर
यूँ ही,
और मुस्कुरा कर रख दिया
अलमारी में

(जानता हूँ - यही करूंगा अगले साल भी
और आने वाले अगले की सालों तक
न जाने कब तक ?? )

मुकेश इलाहाबादी --------------------

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