हक़ से कोई मुझसे रूठे तो

हक़  से  कोई  मुझसे रूठे तो
टूट कर कोई मुझको चाहे तो
नाज़ो - नखरे उठा मैं तो लूँ
पहले मुझको अपना बोले तो
खुशबू -  खुशबू हवा बनूँ पर
कोई मुझ संग संग डोले तो
गीत ग़ज़ल नज़्म निछावर
पहले मेरे संग कोई गाये तो
मुकेश इलाहाबादी -----------  

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है