भले ही न दे मुझको कुछ भी मौला

भले ही न दे मुझको कुछ भी मौला
सबको दे ज़हान भर के खुशी मौला

रहे क्यूँ हर सिम्त अँधेरा ही अँधेरा
बिखरा दे तू हर तरफ चांदनी मौला

मुकेश, जलता हुआ जिस्म है मेरा
मुझको  दे बर्फ की इक नदी मौला

मुकेश इलाहाबादी ----------------

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