इसी बात का गुनाहगार है

इसी बात का गुनाहगार है 
दिल  तेरा ही तलबगार है 
बाहर - बाहर सर्द दिखेगा 
ये दिल अंदर से अंगार है 
मुकेश इलाहाबादी -------

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