फ़िज़ाएं महकने लगती हैं

फ़िज़ाएं महकने लगती हैं
हवाएँ   ठुनकने लगती हैं

तुम्हारे आने से महफ़िल
खुशी से चहकने लगती है

जो रिन्द नहीं उनकी भी
चाल  बहकने  लगती है

बेकाबू हो के मेरी धड़कने
तेज़ तेज़ चलने लगती हैं

मुकेश इलाहाबादी --------

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