दिल का दर्द कागज़ पे उतर आया
दिल का दर्द कागज़ पे उतर आया
कागज़ पे इक समंदर उमड़ आया
कागज़ पे इक समंदर उमड़ आया
जाने किस बात पे रूठ गया था वो
वो गया तो फिर लौट कर न आया
वो गया तो फिर लौट कर न आया
उसकी आँखों में कुछ लिखा तो है
पर मुझ मासूम को न समझ आया
पर मुझ मासूम को न समझ आया
मुकेश इक मुद्दत के बाद घर लौटा
पूरा आलम ही बदला नज़र आया
पूरा आलम ही बदला नज़र आया
मुकेश इलाहाबादी ----------------
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