मन के मानसरोवर मे

मन
के मानसरोवर मे
यादों की
इक झील है
जिसमें तुम्हारे नाम का
ब्रह्म कंवल खिला है
जो कभी मुर्झाता नहीं
झील कभी
सूखती नहीं
(सुमी,, तुम्हीं से)
मुकेश इलाहाबादी,,,,,,

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