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Friday, 27 February 2026

मेरी शायरी तेरी यादों की दरगाह है

 मेरी शायरी तेरी यादों की दरगाह है


मेरी शायरी

तेरी यादों की दरगाह है,

जहाँ इश्क़ के चाहने वाले

चुपचाप सज्दा करने आते हैं।


यहाँ कोई शोर नहीं होता,

बस धड़कनों की धीमी अज़ान

और लफ़्ज़ों की महकती चादर

मज़ार पर बिछी रहती है।


हर शेर

एक जलता हुआ चिराग़ है,

जिसमें तेरी याद का तेल

धीरे-धीरे जलता रहता है।


जो भी थका-मांदा आशिक़

अपना दिल थामे आता है,

उसे यहाँ

अपने दर्द का हमसफ़र मिल जाता है।


मेरी ग़ज़लों की सीढ़ियों पर

आँसुओं के निशान हैं,

और हर मतले में

तेरे नाम की फुसफुसाहट।


ये दरगाह किसी शहर में नहीं,

मेरे सीने के अंदर है 

जहाँ तेरी याद का परचम

आज भी हवा में लहराता है।


और मैं…

बस एक ख़ादिम हूँ इस मुक़ाम का,

जो हर नए ज़ख़्म को

तेरे नाम की चादर ओढ़ा देता है।


मुकेश ,,,,,,,,,,

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