तुम्हारे नाम से

 तुम्हारे नाम से इतनी नज़्में लिख जाऊँगा

कि हर सफ़्हा तुम्हारी सदा से महक उठेगा,

ज़माना जब मिसाल ढूँढेगा इश्क़ की 

तो मेरी तहरीरों का हवाला देगा।


मैं हर हरफ़ में तुम्हारी आहट रख दूँगा,

हर मिसरे में तुम्हारी रूह की लरज़िश,

कि पढ़ने वाला भी

अपने दिल की गिरहें टटोलने लगे।


तुम्हारा नाम

मेरे लिए सिर्फ़ नाम नहीं —

एक रौशन धागा है,

जिससे मैं ख़्वाब, दर्द, ख़ामोशी

सब पिरोता चला जाता हूँ।


देखना,

जब लफ़्ज़ थक जाएँगे

और स्याही सूखने लगेगी,

तब भी तुम्हारा ज़िक्र

मेरी रगों में रवाँ रहेगा।


और लोग कहेंगे 

किसी ने मोहब्बत को

इतनी शिद्दत से जिया था

कि उसका नाम

नज़्मों की दुनिया में

एक दास्तान बन गया।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,

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