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Friday, 3 April 2026

आदत बनता हुआ प्रेम

 आदत बनता हुआ प्रेम


प्रेम!

मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ

और जो कहना चाहता हूँ

उसे इज़हार में नहीं

रोज़मर्रा की छोटी-छोटी आदतों में रख देना चाहता हूँ…


प्रेम!


शुरुआत में

तुम हलचल थे

धड़कनों की रफ़्तार थे

नींद उड़ा देने वाली बेचैनी थे


लेकिन धीरे-धीरे

तुम

आदत बन गए…


प्रेम!

अब

तुम्हारा नाम सुनकर

दिल उछलता नहीं

बस

मुस्कुरा देता है…


जैसे सुबह की चाय

जैसे शाम की हवा

जैसे कोई जाना-पहचाना रास्ता…


प्रेम!

पहले

तुमसे मिलने के लिए

मैं वक़्त निकालता था

अब

तुम

वक़्त के बिना भी

मेरे साथ रहते हो…


प्रेम!

पहले

तुम्हारे बिना

कुछ भी अच्छा नहीं लगता था

अब

सब कुछ अच्छा लगता है

क्योंकि

तुम हर चीज़ में शामिल हो…


प्रेम!

पहले

तुम एक ख़्वाब थे

जिसे छूने की जल्दी थी

अब

तुम एक सच्चाई हो

जिसे खोने का डर नहीं

बस

संजोने की आदत है…


प्रेम!

अब हम

कम बातें करते हैं

कम कहते हैं

कम जताते हैं

लेकिन

हर चुप्पी में

तुम साफ़ सुनाई देते हो…


प्रेम!

लोग कहते हैं

आदतें बुरी होती हैं

लेकिन तुम

सबसे अच्छी आदत हो

जिसे मैं

कभी छोड़ना नहीं चाहता…


प्रेम!

अब तुम

कोई कहानी नहीं रहे

न कोई कविता

न कोई इज़हार


तुम बस

मेरे जीने का तरीका बन गए हो…

आदत बनता हुआ प्रेम


शायद

यही सबसे सच्चा रूप है तुम्हारा


जहाँ

तुम महसूस नहीं होते

फिर भी

हर पल मौजूद रहते हो…


मुकेश ,,,,,,,,,,

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