छोटा बच्चा
माँ की उँगली थामे चलता है,
जैसे कोई पहली बार
धरती से परिचय कर रहा हो।
उसकी पकड़ में
डर भी है, भरोसा भी
और माँ
उस एक उँगली में
पूरा आकाश थामे खड़ी है।
.
गुब्बारा हवा में तैरता है,
लाल, पीला, नीला
और बच्चा
अपनी छोटी-सी दुनिया लेकर
उसे पकड़ने दौड़ता है।
हर किलकारी में
एक नई सृष्टि जन्म लेती है
जहाँ
खुशी का कोई कारण नहीं होता,
बस होती है।
.
दूध के लिए रोता बच्चा,
चेहरा सिकुड़ा हुआ,
आँखों में आँसू चमकते हुए
मगर जैसे ही
माँ की गोद मिलती है,
वो रोना
धीरे-धीरे पिघल जाता है,
जैसे
दुनिया की सारी तकलीफ़ें
एक छाती से लगकर
हार मान लेती हों।
.
घुटनों के बल चलता बच्चा,
हर कदम पर गिरता, संभलता
फर्श उसके लिए
एक पूरा ब्रह्मांड है।
माँ दूर बैठी देखती है,
उसकी हर छोटी जीत पर
आँखों में चमक लिए
जैसे
वो किसी सम्राट का उदय देख रही हो।
.
डगमगाते क़दमों से
जब बच्चा पहली बार चलता है,
तो घर की दीवारें भी
जैसे मुस्कुरा उठती हैं।
नानी, नाना,
दादी, दादा
सबके चेहरे पर
एक ही उजाला
कि जीवन
फिर से शुरू हो सकता है।
सोया हुआ बच्चा,
चेहरे पर दूध-सी शांति,
होठों पर हल्की मुस्कान
शायद
वो किसी सपने में
सितारों से खेल रहा है,
या किसी फरिश्ते से
धीरे-धीरे बातें कर रहा है।
उसकी नींद में
कोई बोझ नहीं,
सिर्फ़ मासूमियत है।
.
माँ के कंधे पर सिर रखे
धीरे-धीरे सोता बच्चा,
उसकी साँसें
माँ की धड़कनों से मिल जाती हैं।
जैसे
दो शरीर नहीं,
एक ही जीवन
धीरे-धीरे बह रहा हो।
.
बच्चा अचानक हँस पड़ता है,
बिना किसी वजह के
शायद
उसे वो दिखता है
जो हम खो चुके हैं,
या वो सुनता है
जो हमें अब सुनाई नहीं देता।
उसकी हँसी में
ईश्वर की झलक होती है।
९.
छोटी-सी हथेली में
जब वो किसी की उँगली पकड़ता है,
तो लगता है
जैसे वो कह रहा हो,
“मत छोड़ना…”
और सच तो ये है
वो हमें नहीं,
हम उसे पकड़कर
जीना सीख रहे होते हैं।
.
आईने के सामने खड़ा बच्चा,
खुद को देख कर हँसता है
उसे नहीं पता
ये कौन है,
बस इतना जानता है
कि ये कोई अपना है।
और शायद
यही सबसे सच्ची पहचान है
जहाँ “मैं” और “तू”
अभी अलग नहीं हुए।
मुकेश ,,,,,,,
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