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Sunday, 17 May 2026

समय के मलबे पर (3)

 समय के मलबे पर

एक टूटी हुई सीढ़ी पर

अब भी

कदमों की आहट रखी है।

कोई

बहुत पहले गया था,

लेकिन

जाना पूरी तरह नहीं हुआ।

मुकेश ,,,,,,,,,

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