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Sunday, 17 May 2026

समय के मलबे पर (4 )

 समय के मलबे पर (4 )

धूप

पुराने कमरे में

आज भी वैसे ही गिरती है।


सिर्फ़

उसे देखने वाली आँखें

अब पहले जैसी नहीं रहीं।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,


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