होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Sunday, 17 May 2026

समय के मलबे पर (5)

 समय के मलबे पर (5)


मैंने स्मृति को

छूना चाहा,

वह

रेत की तरह बिखर गई।


कुछ चीज़ें

सिर्फ़

दूर से ही जीवित रहती हैं।


मुकेश ,,,,

No comments:

Post a Comment