प्रयाग : समय की नदी में लिखा हुआ एक शोध-काव्य
I. वैदिक युग — जहाँ स्थान देवताओं की साँस था
वहाँ न कोई नगर था,
न कोई सीमाएँ थीं,
सिर्फ़ संगम था—
जहाँ जल नहीं,
ऋचाएँ मिलती थीं।
गंगा बहती थी
यज्ञ की अग्नि-रेखाओं के साथ,
यमुना उतरती थी
मानसिक शांति की तरह।
और सरस्वती—
कहीं अदृश्य,
पर हर मंत्र में उपस्थित।
प्रयाग तब कोई नाम नहीं था,
वह एक क्रिया था—
“मिलना”।
II. महाजनपद और प्रारम्भिक राज्य — तीर्थ से नगर की ओर
समय ने पहली बार
रेत पर पदचिह्न बनाए।
अब यहाँ मेले लगते थे—
जहाँ ऋषि और यात्री
एक ही प्रश्न पूछते थे,
“कौन भीतर जा रहा है?”
नदी किनारे
व्यापार और तप
एक ही धागे में बंधने लगे।
प्रयाग धीरे-धीरे
एक भूगोल बन रहा था,
पर अभी भी आत्मा था।
III. मौर्य युग — राज्य और धर्म का संगम
Maurya Empire
अब धरती पर आदेश लिखे जाते थे,
पत्थरों पर धर्म बोलता था।
अशोक के समय
यहाँ शिलालेखों की भाषा आने लगी,
और वह स्तंभ
जो आज भी चुप खड़ा है—
कभी सत्ता और सत्य का संदेशवाहक था।
संगम अब तीर्थ भी था,
और साम्राज्य का स्मृति-स्थल भी।
IV. गुप्त काल — संस्कृति का स्वर्ण प्रवाह
नदी अधिक शांत नहीं हुई,
पर उसके किनारे सुंदर हो गए।
कविता, दर्शन, कला—
सब जल की तरह फैलने लगे।
प्रयाग अब
तीर्थ और संस्कृति दोनों था,
जहाँ धर्म
शब्दों में सांस लेता था।
V. हर्षवर्धन युग — सभाओं और श्रद्धा का नगर
Harsha Empire
यहाँ अब मेले नहीं,
महा-सभा होती थी।
हर्ष की प्रयाग सभा में
राजा भी यात्री बन जाता था,
और दान
राजनीति से बड़ा कर्म बन जाता था।
प्रयाग अब
एक आध्यात्मिक राजधानी था
जहाँ राज्य झुककर
धर्म से बात करता था।
VI. मध्यकाल — परिवर्तन और संघर्ष की छाया
समय अब धीरे नहीं,
तेज़ और अस्थिर था।
नई सत्ता की आहट
नदी के पानी में भी सुनाई देने लगी।
पुराना प्रयाग
अब नए नक्शों में ढल रहा था
कभी टूटता, कभी बनता।
VII. मुगल काल — किले और सत्ता का स्थापत्य
Mughal Empire
अब संगम के पास
पत्थर उठने लगे।
Allahabad Fort
जहाँ पहले ऋषियों के पदचिह्न थे,
अब साम्राज्य की दीवारें थीं।
अकबर ने इसे देखा
और कहा, यह स्थान
सिर्फ़ तीर्थ नहीं,
सत्ता का केंद्र भी है।
प्रयाग अब “इलाहाबाद” बनने की ओर था
जहाँ नदी, धर्म और शासन
एक ही क्षितिज पर खड़े थे।
अंतिम छवि — समय का संगम
और इस तरह प्रयाग
कभी वेद बना,
कभी शिलालेख,
कभी सभा,
कभी किला।
पर वह कभी खत्म नहीं हुआ
वह बस बदलता रहा
अपने ही जल में
अपना ही चेहरा देखकर।
मुकेश ,,,,,,,,,
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