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Friday, 15 May 2026

चौदहवाँ तमाशा - स्मृतियों का तमाशा

 चौदहवाँ तमाशा - स्मृतियों का तमाशा


कुछ यादें

पुराने घरों की तरह होती हैं।


हम जानते हैं

वहाँ अब कोई नहीं रहता,

फिर भी

बार-बार लौट जाते हैं।


मनुष्य

कई बार वर्तमान में नहीं,

अपनी स्मृतियों के खंडहरों में जीता है।


और सबसे अजीब बात

उसे

वहीं सबसे ज़्यादा अपनापन मिलता है।


मुकेश ,,,,,,

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